Urs of Ala Hazrat R. A Celebrated with great success and amid Aqidat. Three day 92th urs of Imam -e-Ahle Sunnat ended here on 31st Jan 2011 .
बरेली, जागरण संवाददाता: फिजा में रह-रहकर नारा-ए-तकबीर अल्लाहुअकबर, नारा-ए-रिसालत या रसूल्लाह की गूंज थी। मंच पर मुल्क की मशहूर दरगाहों के नामवर सज्जादगान और बैरूनी मुल्कों के उलेमा-ए-कराम आसीन थे। कोई उन्हें इश्क-ए-रसूल का दरिया तो कोई इल्म का आफताब करार दे रहा था। आला हजरत इमाम अहमद रजा खां फाजिले बरेलवी की शान में कहे जा रहे इन अल्फाज की कुल में अकीदतमंदों का सैलाब गवाही दे रहा था। इस्लामिया से लेकर दरगाह, कुतुबखाना (घंटाघर), नावल्टी रोडवेज, सिकलापुर चौराहा, बिहारीपुर चौकी से चौपुला, राजकीय इंटर कालेज कोतवाली रोडवेज और मलूकपुर नाले से इस्लामिया तक तमाम रास्ते फुल थे। अकीदतमंदों का कांधे से कांधा रगड़ रहा था।
आला हजरत के कुल में अकीदतमंदों के आने का यह सिलसिला तड़के फज्र की नमाज के बाद से शुरू हो गया। इस नूरानी महफिल की शुरूआत कुरान ख्वानी से हुई। कारी नासिर रजा कर्नाटकी ने तिलावते कलाम पाक पेश किया। इसके बाद शोहरा-ए-कराम ने कलाम का नजराना पेश किया। शायर असद इकबाल, कारी अहमद शाहजहांपुरी, मौलाना सुहेल देहलवी, मौलाना सिराज अहमद अजहर मुम्बई ने आला हजरत की लिखी नात व मनकबत पढ़ीं। जैसे-तैसे दिन चढ़ता गया, भीड़ बढ़ती गई। लोगों के इस्लामिया मैदान की तरफ बढ़ने का यह सिलसिला दोपहर ठीक 2.38 बजे थम गया। जैसे ही लाउडस्पीकर पर निजामत कर रहे अली अहमद सिवानी की आवाज गूंजी, कुल की रस्म शुरू होती है, जायरीन के कदम जहां के तहां ठहर गए। ऐसा लगा मानो हिलोरे मार रहा समंदर थम गया हो। भीड़ में सन्नाटा पसर गया। सज्जादानशीन मौलाना सुब्हान रजा खां सुब्हानी मियां की सदारत में कारी अब्दुर्रहमान खां कादरी, कारी अमानत रसूल, कारी सखावत, कारी अमीर हमजा ने फातेहा, शजरा मौलाना मुख्तार बहेड़वी और सलातो सलाम मौलाना जहूरुल इस्लाम ने पढ़ा। आखिर में दुआ मौलाना तौसीफ रजा खां, वली अहद मौलाना अहसन रजा खां कादरी और दरगाह मारहरा शरीफ के नायब सज्जादानशीन हजरत सैयद नजीब हैदर ने बारी-बारी कराई। इसी के साथ आला हजरत के 92 वें उर्स का इख्तताम (समापन) हो गया। कुल की भीड़ से सारा शहर जाम हो गया, जिस खुलने में शाम हो गई। कुल में 5 से 7 लाख भीड़ आने के कयास लगाए जा रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक अभिसूचना इकाई ने इस्लामिया मैदान की भीड़ ढाई लाख आंकी है, जो पिछले साल 85 हजार बताई गई थी। कुल के दौरान प्रशासन और पुलिस के सभी छोटे बड़े अधिकारी सड़कों पर रहे। आला हजरत के उर्स में आए जायरीन फंसे 
कुल में हिस्सा लेने आए बहुत से जायरीन रात में रुकने के बाद आज गंतव्य पर जाने के लिए निकले। इसी बीच आईटीबीपी में भर्ती को पहुंचे लड़कों ने हंगामा मचा दिया। जंक्शन पर लड़कों की भारी भीड़ इकट्ठा हो गई। लखनऊ और दिल्ली की तरफ जाने वाली सभी ट्रेन छत तक फुल हो गईं। ऐसे में जायरीन परेशान होने लगे। मजहर इस्लाम को अपने पांच साथियों के साथ कलकत्ता जाना था। ऐसे ही अजहर इत्यादि केरल से आए थे। पश्चिम बंगाल, बिहार, मध्य प्रदेश, गुजरात, असम, उड़ीसा के जायरीन भी ट्रेन नहीं पकड़ सके। जायरीनों को आ रही दिक्कत की सूचना पर दरगाह आला हजरत से भी लोग पहुंच गए। तसलीम रजा खां, जमात रजा-ए-मुस्तफा के महासचिव मौलाना शहाबुद्दीन रजवी, दरगाह के मीडिया प्रभारी नासिर कुरैशी और जनसेवा मंच के पम्मी खां वारसी इत्यादि ने जंक्शन पहुंचकर जायरीनों से उनकी दिक्कतें जानी। रेलवे अफसरों से भी बात की। तय हुआ कि जायरीनों को वापस दरगाह बुला लिया जाए। यहीं से बाद में बाहर भेजने की व्यवस्था की जाएगी। इंग्लैंड और अमेरिका से आए जायरीन को प्लेन पकड़ने के लिए दिल्ली जाना था, वे भी दरगाह पर रुक गए हैं। लंकाशायर इंग्लैंड से आए सैयद जुल्फिकार अली को गरीब रथ से दिल्ली जाना था लेकिन जा नहीं सके। बड़ी संख्या में जायरीन को रिजर्वेशन निरस्त कराना पड़ा। अब वे हालात सामान्य होने तक बरेली में ही फंसे रहेंगे।
The Sea of Aqidat in Qul Sharif
बरेली। फिजा में नारे। मंच पर मुल्क की मशहूर दरगाहों के नामवर सज्जादगान और बैरूनी मुल्कों के उलेमा-ए-कराम। कोई उन्हें इश्क-ए-रसूल का दरिया तो कोई इल्म का आफताब करार दे रहा था। आला हजरत इमाम अहमद रजा खां फाजिले बरेलवी की शान में कहे जा रहे इन अल्फाज की कुल में अकीदतमंदों का सैलाब गवाही दे रहा था।
आला हजरत के कुल में अकीदतमंदों के आने का यह सिलसिला तड़के फज्र की नमाज के बाद से शुरू हो गया। इस नूरानी महफिल की शुरूआत कुरान ख्वानी से हुई। कारी नासिर रजा कर्नाटकी ने तिलावते कलाम पाक पेश किया। इसके बाद शोहरा-ए-कराम ने कलाम का नजराना पेश किया। शायरों ने आला हजरत की शान में लिखी नात व मनकबत पढ़ीं। इस्लामिया मैदान की तरफ बढ़ने का यह सिलसिला दोपहर ठीक 2.38 बजे थम गया। जैसे ही लाउडस्पीकर पर आवाज गूंजी, कुल की रस्म शुरू होती है, जायरीन के कदम जहां के तहां ठहर गए। ऐसा लगा मानो हिलोरे मार रहा समंदर थम गया हो।भीड़ में सन्नाटा पसर गया। सज्जादानशीन मौलाना सुब्हान रजा खां सुब्हानी मियां की सदारत में कारी अब्दुर्रहमान खां कादरी, कारी अमानत रसूल, कारी सखावत, कारी अमीर हमजा ने फातेहा, शजरा मौलाना मुख्तार बहेड़वी और सलातो सलाम मौलाना जहूरुल इस्लाम ने पढ़ा। आखिर में मुल्क व कौम की तरक्की, भाईचारा, खुशहाली, अमन-चैन की दुआ मौलाना तौसीफ रजा खां, वली अहद मौलाना अहसन रजा खां कादरी और दरगाह मारहरा शरीफ के नायब सज्जादानशीन हजरत सैयद नजीब हैदर ने बारी-बारी कराई। इसी के साथ आला हजरत के 92 वें उर्स का इख्तताम हो गया।
तकरीर से झकझोर दिया मजमा







ARAY JANAB KYA SIRF URS SHAREEF. HALWA SHAREEF. MELAAD SHAREEF.. LANGAR SHAREEF HE ISLAM HAY KYA?? AGAR YEH SUB ISLAM HOTA TAU SAHABA E IKRAM. HAMARY RASOOL SAW KA URS ZAROOR MANATAY. KYA ISLAMI TAREEKH MAIN KISI NABI YA SAHABI KA URS MANANAY KA KOI EK SABOOT BHI MOJOOD HAY.. AAKHIR AAP LOG ISLAM KI SHAKAL BIGAR KAR KYA CHAHTAY HAIN..
HINDU LOG MOORTI KAY SAMNAY BHAJAN GATAY HAIN AUR AAP LOG DARGAH PAR QAWALI GATAY HAIN.. HINDU NAY APNA BHAGWAN APNAY SAMNAY KHARA KIYA HOTA HAY AUR US SAY PARARTHANA KARATAY HAIN.. AUR AAP LOGON NAY QABAR MAIN LITAYA HOTA HAY AUR US SAY MURADAIN MANGTAY HAIN.. HINDU PANDAT BHAGWAN KA PUJARI BUN KAY MANDIR MAIN BETHA HOTA HAY AUR AAP LOGON KA GADDI NASHEEN DARGAH PAR PUJARI BUN KAY BETHA HAY.. HINDU LOG RAM KI JANAM ASHTAMI MANATAY HAIN AUR AAP LOG MELAAD UL NABI.. YEH SUB KYA HAY?? KYA HAMARAY RASOOL SAW NAY HUMAIN AISA DEEN DIYA THA???
Tum Kaabe sharif ke pathhar ka tawaf karte ho Hindu Log bhi murtion ka tawaf karte hain.
Tum Kaba sharif main bal mundate ho Hindu bhi Banaras main bal mundaate hain.
Tum zameen ko sajda karte ho hindu bhi karte hain.
Tumshadi main music/kharcha karte ho hindu bhi karte hain.
Tum rishwat lete ho Hindu bhi lete ho.
Tum jhoot bolte ho Hindu bhi Bolte hain.
Tum Allah ko yaad karte ho Hindu bhi apne god ko yaad karte hain.
Fark batao??????
kya kisi nabi ne internet per comment karne ka hukm diya tha ?????
Hum to na Rasul SAW ko murda mante hain, na sahaba ko, na koi saheed ko, aur na koi swaleeheen (AULIA ALLAH) ko, agar tum mante ho to hum kia kare, Ala Hazrat ne kia khub jawaab diya dushmane Rasul ko kehte hain “TERI DAWSAZK SE TO KUCH CHIYNA NAHIN KHULD MEIN PONHCHA RAZA PHIR TUJH KO KIA” WAHABIY, DEOBANDI MARDOOD AUR JAHANNAMI HEIN
HUM KAABA SHARIF K PATHARO KA TAWAF NAHI KARTE ALLAH K GHAR KA TAWAF KARTE HAIN.PATHER TO DUNIYA MEIN AUR BHI HAIN,HUM ZAMEEN KO SAJDA NAHI KARTE HUM ZAMIN PAR SIR RAKH KAR ALLAH KO SAJDA KARTE HAIN, BATAUFIQUE MUSLIM JHOOT NAHI BOLTE,RISHWAT NAHI LETE,SHADIYON MEIN MILAD PADHATE HAIN,HARAM SHRIF MEIN BAL ALLAH KI RAZA K LIYE MUNDHWATE HAIN,HUM KAUN HOTE HAIN ALLAH KO YAAD KARNEWALE WO TO RAB KI RAHMAT AUR USKE MAHBOOB (S.A.W)KA SADKA HAIN JO WO HUM SE APNA ZIKR KARWA LETA HAIN.KAFIRO KI WO JAANE JO HAMARE RAB KO NAHI MANTA WO IS LAIQUE NAHI K USPE GAUR KIYA JAYE.
islam ka phela urs NABI PACK ne hajrat hamja ka manaiya tha.tume pata nai hea.aur tum to angrej ki aulad ho.kiya tome pata nahi.jange azadi me deobandi kiya kar ra the.