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Tag Archives: Barelwi

500 Most Influential Muslims of the World , Mufti Akhtar Raza Khan is on 26th

23 Aug

The new Edition of Most Influential Muslims of the World has been released with some ups and downs in the year 2010.

Mubarakbaad to Ahle Sunnah of India.

Now the Mufti Akhtar Raza Khan Azhari Mian has been ranked 26th in the list.He is leaving behind many famous and Popular Personalities of the world. See List.

Known for his Scholarship and Tawqa Hazrat Azhari Mian is Grand Mufti of India.He has been Considered leader of Indian Sunni Barelwis.

Hazrat Syed Ameen Mian of Barkatiya Silsila  has also been mentioned with Honour in the category of Islamic Scholars of India.

The list  also contains names of Maulana Ilyas Attar Qadri and other  major Sunnis as well

About the Publication

This publication is the second of an annual series that provides a window into the movers and shakers of the Muslim world. It highlights people who are influential as Muslims, that is, people whose influence is derived from their practice of Islam or from the fact that they are Muslim. It gives valuable insight into the different ways that Muslims impact the world, and also shows the diversity of how people are living as Muslims today.

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Historical Sunni Conference 2010 in Moradabad U.P

6 Jan

कार्यालय संवाददाता, मुरादाबाद : सुन्नी कांफ्रेंस में वहाबियत के खिलाफ आवाज बुलंद करने का संकल्प लिया गया। रविवार को ठंडे मौसम और रिमझिम बूंदाबांदी के बीच कंपनी बाग में इकट्ठे हुए भारी हुजूम के बीच कांफ्रेंस में वहाबियों पर अवैध तरीके से मस्जिद, वक्फ संपत्तियों और खानकाहों को कब्जाने का आरोप लगाया गया। साथ ही कहा गया कि इन्हें मुक्त कराने के लिए केंद्र और प्रदेश सरकार से भी मुतालबा करेंगे। इसके साथ ही खूनखराबा कर अवाम में दहशतगर्दी फैलाने वालों की जमकर आलोचना की गई। कहा गया कि ऐसे आतंकियों का इस्लाम से कोई वास्ता नहीं है और हर सच्चा मुसलमान आतंक के खात्मे के लिए सहयोग करे। आल इंडिया उलेमा व माशाइख बोर्ड के बैनर तले कंपनी बाग में सुबह दस बजे आयोजित कांफ्रेंस में कई प्रदेशों से आए सुन्नी मुसलमानों का सैलाब ही उमड़ पड़ा। नारा-ए-तकबीर, अल्लाहो अकबर के नारों से लबरेज इस रूहानी कांफ्रेंस में उलेमा, खानकाहों के सज्जादानशीन, इमाम और हजरत मोहम्मद (स) से मोहब्बत रखने वालों के जमावड़े से कंपनी बाग का विशाल ठ्ठ मैदान भी तंग हो गया। उलेमाओं ने कहा कि सच्चा मुसलमान वही है, जो हजरत मोहम्मद (स) ख्वाजा गरीब नवाज मुईनुद्दीन चिश्ती को मानने वाला हो। कांफ्रेंस को खिताब करते हुए माशाइख बोर्ड के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना सैयद महमूद अशरफ किछौछवी ने कहा कि सुन्नी मुसलमानों की बड़ी तादाद अपने अधिकार हासिल करने से वंचित है। तेरह फीसदी वहाबियों ने 80 प्रतिशत सुन्नी मुसलमानों की कयादत अपने हाथ में ले ली है। उन्होंने आजादी की लड़ाई में शहीद होने वाले मौलाना फजलेहक खैराबादी, किफायत हुसैन काफी, मुफ्ती इनायत हुसैन काकोरी और मौलाना लुतफुल्ला अली का जिक्र करते हुए उन्हें सच्चा सुन्नी मुसलमान बताया। कहा कि देश की आजादी के बाद सुन्नी मुसलमान सियासत को गैर जरूरी समझकर अपनी खानकाहों में चले गए और वहाबी सियासत में इक्तेदार (सत्ताधारी) हो गए। कांफ्रेंस में मौलाना मोहम्मद हाशिम कानपुरी ने कहा कि सुन्नी मुसलमानों को अब वहाबियों की न कयादत पंसद है और ना इमामत। अब सुन्नी मुसलमान हज कमेटी, मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड, सुन्नी वक्फ बोर्ड, उर्दू अकादमी का चेयरमैन जैसे पदों के लिए आबादी के हिसाब से अपना हक हासिल करेंगे। बरेली से आए मौलाना तौकीर रजा खां ने कहा कि आतंकवाद के नाम पर मुसलमानों को रुस्वा किया जा रहा है। उन्होंने फास्ट ट्रैक अदालतों में मुकदमा चलाकर बेगुनाह मुसलमानों को रिहा करने और दोषी लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की। कांफ्रेंस में जफर मसूद किछौछवी ने कांफ्रेंस के उद्देश्य पर रोशनी डाली। सैयद शाहिद मियां अजमेर ने मोहम्मद साहब को न मानने वालों पर कटाक्ष किया। मुफ्ती मुईन उद्दीन ने सुन्नियत की तरक्की की राह दिखाई। राष्ट्रीय महासचिव सैयद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने 16 सूत्रीय प्रस्ताव पेश किया, जिसका पूरे हुजूम ने हाथ उठाकर समर्थन किया। मोहम्मद (स) पर सलाम पेश करने के बाद सैयद महमूद अशरफ किछछौवी ने मुल्क में अमनो-अमान और कौम की खुशहाली की दुआ कराई। अंत में तय हुआ कि अगली कांफ्रेंस कानपुर में होगी। कांफ्रेंस की शुरूआत कारी मोहम्मद गुलजार नईमी ने कुरान की तिलावत से की, जिसका उर्दू तर्जुमा मुफ्ती मोहम्मद अय्यूब खां नईमी और हिंदी तर्जुमा मोहम्मद अहमद नईमी ने किया। तराना नूर कादरी अशरफी ने पेश किया। इस मौके पर कारी अबुल फतह राजस्थान, शाहिद मियां, सकलैन मियां- बरेली, मौलाना मोहम्मद याकूब-दिल्ली, मुफ्ती हामिद खां- बिहार, असलम मियां-पीलीभीत, फरहत जमाली- रामपुर, सलामत मियां- खबडि़या शरीफ, शिम्मी मियां- कलियर, अब्दुर्रहमान खां चिश्ती- मैनपुरी, डा. शुएब- इटावा, मौलाना निजामुद्दीन मुम्बई, सैयद असलम मियां, नैयर मियां- रुदौली, सैयद राशिद फरीदी- रजबपुर, मौलाना यामीन नईमी, कारी इख्तेसासुददीन, सैयद हामिद मियां, काजी मरगूब अली, मौलाना फुजले अहमद- लखनऊ, सैयद बाबर अशरफ समेत तीन सौ से अधिक उलेमा व खानकाहों के सज्जादानशीन मौजूद थे। संचालन मौलाना रईस अशरफ, मोहम्मद हाशिम नईमी और मौलाना कलीम अशरफ ने किया
कार्यालय संवाददाता, मुरादाबाद :
कंपनी बाग में हुई सुन्नी कांफ्रेंस में कमोबेश हर तकरीर करने वाले ने यह जताने की कोशिश की कि मुल्क में मुसलमानों की आबादी में से अस्सी फीसदी सुन्नी मुसलमान हैं, लेकिन उन्हें हक नहीं मिल रहे हैं। साफ तौर पर यह भी जता दिया गया कि सुन्नी अब खामोश रहने वाले नहीं हैं। कांफ्रेंस में साफ किया गया कि लोग समझते हैं कि मुसलमानों में दो फिरके शिया और सुन्नी हैं, लेकिन फिरके तीन हैं – शिया, सुन्नी और वहाबी। तकरीर में ये भी साफ हो गया कि शिया मसलक के लोग तादाद में कम होने के बावजूद शिया वक्फ बोर्ड की हिफाजत करने में कामयाब रहे, लेकिन सुन्नी तादाद में ज्यादा होने के बावजूद वक्फ बोर्ड पर अपना कब्जा बनाए रखने में कामयाब नहीं हो सके। यहां तक कि सुन्नी वक्फ बोर्ड में चेयरमैन से लेकर चपरासी तक एक भी सुन्नी मुसलमान नहीं है। वक्फ बोर्ड के मौजूदा नेतृत्व पर खानकाहों और मस्जिदों को महफूज रखने में नाकाम रहने का आरोप भी लगाया गया। कामयाबी के मुकाम तक पहंुची कांफ्रेंस के जरिए यह भी जताने की कोशिश की गई कि केंद्र व प्रदेश सरकार और सियासी पार्टियों के आला नेता भी साफ समझ लें कि अब बहुत दिनों तक सुन्नी फिरके के लोगों को उनके हकों से महरुम नहीं रखा जा सकता। इसका अंदाज इसी से लगाया जा सकता है कि नारे लगाने वालों को रोकते हुए तकरीर करने वालों ने कहा कि वक्त नारे लगाने का नहीं, बल्कि कांफ्रेंस में पारित प्रस्तावों पर अमल का है
Scholars Sayings–
मुरादाबाद, कासं : सुन्नी कांफ्रेंस में वहाबियों की कयादत और इमामत से इनकार करने के साथ ही केंद्र सरकार से भी दो-दो हाथ करने का ऐलान किया गया। उलेमाओं ने 16 सूत्री ज्ञापन पर गौर करने के लिए इद्दत (चार महीने 13 दिन) की मुद्दत तक का ऐलान किया। कांफ्रेंस की कामयाबी से खुश उलेमाओं ने कहा इसमें पारित प्रस्तावों को राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और सभी प्रांतों में मुख्यमंत्रियों को भेजा जाएगा। तय हुआ कि अगर इस मुद्दत तक केंद्र सरकार ने उनके प्रस्तावों पर गौर नहीं किया तो दिल्ली में सरकार का घेराव किया जाएगा।
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कार्यालय संवाददाता, मुरादाबाद : आल इंडिया उलेमा व मशाइख बोर्ड के बैनर तले आयोजित कांफ्रेंस में शिरकत करने आए खानकाहों के सज्जादगान और उलेमाओं ने सुन्नियत को इस्लाम की पहली कड़ी बताया। कहा कि जो हजरत मोहम्मद (स) और उनकी आल (औलाद इमाम हुसैन आदि) एवं सूफिज्म को न माने, वो मुसलमान नहीं, बस मुसलमान जैसा है। उलेमाओं ने केंद्रीय मदरसा बोर्ड के गठन को मुसलमानों की जरूरत बताया। सैयद शाहिद मियां-सज्जादा दरगाह ख्वाजा मुईनुदद्ीन चिश्ती कहते हैं कि कुरान में जगह-जगह अल्लाह के नेक बंदों की तरफ इशारा किया गया है, कि उन्हें मुर्दा मत जानो, लेकिन वहाबी उनकी शान में गलत अलफाजों का इस्तेमाल कर इस्लाम के खिलाफ प्रोपेगंडा कर रहे हैं। जबकि सूफिज्म के जरिए ही हिंदुस्तान में इस्लाम फैला। उन्होंने वहाबियों की साजिश को बेनकाब करने की हिमायत की। मौलाना मोहम्मद हाशिम कानपुरी कहते हैं कि सुन्नी मुसलमान अपने हक से महरूम हैं। देश की आजादी से अब तक सुन्नियों को महरूम रखा गया। अब हक की लड़ाई शुरू की गई है। उन्होंने वहाबियत को गैर मुस्लिम तो करार नहीं दिया, लेकिन मुसलमानों जैसा बताया। कहा कि वहाबी अल्लाह के रसूल की नाफरमानी कर रहे हैं। मुफ्ती मुईनुदीन फैजाबादी कहते हैं कि सुन्नी मसलक के लोग हजरत मोहम्मद (स) के लोग आखिरी नबी मोहम्मद साहब की तौहीन बर्दाश्त नहीं कर सकते। उनका अकीदा है, उन्हें जीने में वो मजा नहीं आता जो मोहम्मद (स) के नाम पर मरने में आता है। अब सुन्नियों में जागरूकता आई है, अपना हक लेकर रहेंगे। मौलाना तौकीर रजा कहते हैं कि मुसलमानों को मदरसा बोर्ड की जरूरत है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने कुछ मुसलमानों (वहाबियों) को मदरसा बोर्ड के विरोध में खड़ा कर दिया है, लेकिन हम बोर्ड का गठन कराकर रहेंगे। उनकी मांगों को नजरअंदाज किया गया तो मुरादाबाद की सरजमीं की तर्ज पर दिल्ली की सरजमीन पर सुन्नी मुसलमानों का सैलाब बरपा होगा। मौलाना जफर मसूद किछौछवी ने कहा कि उलेमा व मशाइख बोर्ड सियासत से अलग रहकर सुन्नी मुसलमानों की समस्याओं का निराकरण कराएगा। हज कमेटी, उर्दू अकादमी जैसे पदों पर तादाद के हिसाब से हक मांगा जाएगा।

184 killed in Eid-ul-fitr homecoming rush in Indonesia: police

19 Sep

JAKARTA: Almost 200 people died on Indonesia’s roads this week as almost 30 million people headed home to celebrate Eid-ul-Fitr, police said Saturday.

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Over 27 million people are expected to be on the move as cities and towns emptied in this year’s exodus marking the completion of the fasting month of Ramadan in the world’s most populous Muslim nation.

‘184 people have been killed on the roads in the past six days from 466 road accidents,’ national police spokesman Nanan Soekarna said. Around 650 people were injured, he added.

‘We urge travellers to truly maintain safety on the road,’ Soekarna said.

At least 548 people were killed, most of them packed onto motorcycles, on Indonesian roads during last year’s exodus.

Indonesians will celebrate the Eid holiday on either Sunday or Monday, depending on the sighting of the new moon. —AFP

Largest Ramzan gathering in Swalath Nagar,Malappuram (Kerala)Sep 16

11 Sep

By IANS,

12 Sep,2009

Malappuram (Kerala) : Islamic charity organisation Ma’dinu Ssaqafathil Islamiyya is gearing up to host the country’s biggest Muslim prayer congregation Sep 16 at Swalatha Nagar near here.Syed Ibrahim Bukhari during Swalat Nagar Meet

The organisation’s chairman, Sayyid Ibrahimul Khaleelul Bukhari, said that they expect about 600,000 people from various parts of the country and abroad to attend the congregation, which will fall on the eve of the 27th day of the Muslim holy month of Ramzan.

“This annual meeting is also considered as one of the largest Muslim gatherings in the world after Mecca and Medina in Ramzan. This is the 24th anniversary of the Swalath Meet and as part of it, the congregation will host a mass pledge where the participants will declare their commitment and solidarity to the fellow citizens, society and nation,” he said.

People

Apart from the main venue, 20 grounds have been set up to accommodate the people, spread across 10 km on either sides of the NH-212. The program would be telecast live and special screening centres are set up in Chennai, Bangalore, Mumbai and Delhi in India and major cities in the Middle East.

“The night long prayers will begin on Sep 16 afternoon with Iftar meet, in which about one lakh (100,000) believers would attend. Everything is put in place for the group feast of Ramzan in the evening,” said Pary Muhammed, the organisation’s secretary.

Ma’dinu is one of the leading educational and charity initiatives among Muslim community in Kerala. It has now grown into a mass movement with more than 25 educational institutes from primary to the post-graduate level.

Deobandi Sunni Clash in Bareilly Sharif

26 Jul

Bareilly (UP), July 24 (PTI) Five persons were injured when two groups of the same community clashed over control of a mosque in the city area here, police said today.

The clash took place last night at Lal Masjid when muslims of Deoband sect were organising a religious meeting which was opposed by those of Barelvi sect, they said.

People of both Deobandi and Barelvi sect claimed that the mosque belonged to them.

Some unidentified people also opened fire during the clash, they said, adding that heavy police force has been deployed in the area to avert any untoward incident.

A meeting has been arranged between leaders of both the sects by the district administration to find an amicable solution.

Urs of Hazrat Bulbul Shah (RA) observed

10 Jul

Traditional Devotion

By NAK, *Urs of Hazrat Bulbul Shah (RA) observed* – Kashmir News Agency – Jammu Tawi, Jammu & Kashmir, India
Friday, July 3, 2009

Mirwaiz Riyaz Hamdani highlights contribution of great sufi saint; thousands throng shrine at Nawakadal

 

Srinagar: A special Urs of Hazrat Bulbul Shah (RA) was observed, here at Nawakadal with religious fervor and traditional devotion.

A large number of devotees from different parts of the valley participated in the Urs celebration and offered Friday prayers at the shrine.

Mirwaiz Riyaz Ahmad Hamdani delivered a sermon on the occasion, praising the contribution of the great saint in imbibing piety and virtuous character among the Kashmiris.

He said the sufi saint has enlightened the people of the valley and showed path of righteousness by preaching great humanistic ideals.

 

 

 

 

THE Qul for martyred religious scholar Dr Sarfraz Naeemi was held at Jamia Naeemia on Sunday

15 Jun

Federal Religious Affairs Minister Hamid Saeed Kazmi, MNA Sahibzada Fazal Karim, Mufti Munib ur Rehman, a large number of political workers and people participated in the Qul held amid tight security.

Later, a convention was also held at the seminary and participants condemned the tragic killing of Allama Naeemi and paid tribute to the Shaheed for his remarkable services for country and religion.

The religious affairs minister said the government would defeat terrorists and the miscreants wouldn’t succeed in their nefarious designs. He said the tragic killing of Allama Naeemi was a highly condemnable incident. He said terrorists had the agenda to spread hatred in the country and government would wipe them out.

Meanwhile, senior Political Assistant to Chief Minister and former MNA Pervez Malik said Dr. Sarfraz Naeemi was a national asset and every person was mourning his tragic death.

He said those involved in suicidal bomb blasts were cowards and enemies of the humanity and were not Muslims in any way, as they were attacking mosques and religious seminaries. He said the involvement of foreign hands could not be ruled out in these attacks and mastermind of series of suicidal attacks would soon be exposed. He said Dr. Sarfraz Naeemi was upholder of peace and he rendered remarkable services for the glory of Islam, promotion of equality and national reconciliation. He said Mufti Naeemi was martyred to spread riots and sectarianism in the country, therefore, the people should not be impatient and try to foil ulterior motives of the anti-Islam forces.

Pervez Malik said Dr. Sarfraz Naeemi always preached unity and harmony among the people and challenged the infidel forces for the sake of right and noble deeds. He said the terrorists had no religion and thought and they were enemies of the whole nation while Dr. Naeemi accepted martyrdom for achieving this purpose and he did not withdraw from principle against extremism. He had visited the four provinces to unite the people against terrorism, saying the people of Pakistan could not be harassed through militancy. He always stressed the need for unity among Muslims which was praiseworthy.

ST shows concern over chaos in NWFP

28 Apr

By: Nisar Mehdi | Published: April 27, 2009

KARACHI – Sunni Tehrik has postponed the “Difa-e-Islam” rally, scheduled against the promulgation of Nizam-e-Adl Regulation (NAR) in Swat on Sunday, on the request of Chief Minister Sindh Qaim Ali Shah.
Awami National Party (ANP), an ally of the ruling PPP, has declined to call off wheel jam strike on May 12.
Talking to The Nation, ST central leader Shakeel Qadri said that Sindh CM had requested the ST leadership to postpone a very important party rally in the wake of terrorism threat and imposition of Section 144 in Sindh.
He said that CM had assured us to arrange a meeting of ST leadership with the prime minister so that they could inform the premier about the viewpoint and reservations of Sunni Tehrik about the NAR and killings of Ahl-e-Sunnat Ulema and people in NWFP. He added that the CM would inform the ST leadership within next two days about meeting with the PM.
He informed that the ST protest campaign against promulgation of the NAR in Swat continued in other parts of the country but demos in Sindh was called off due to imposition of Section 144.
Shakeel Qadri led the six members of ST delegation met with the Sindh CM. Sindh Home Minister Dr Zulfiqar Mirza, provincial advisor Rashid Rabbani and Waqar Mehdi assisted the chief minister.
Home Minister Sindh Dr Zulfiqar Mirza said that ST expressed dismay and grief over the killings of their leaders and custodians of saints’ shrines in Swat and destruction of the shrines by the terrorists. “The chief minister informed them about the reports of possible terrorism and bloodshed therefore ST agreed with the Sindh government’s viewpoint and called off their protest in Sindh,” he added.
Qaim Ali Shah informed the ST delegates that law enforcement agencies were given clear directives that they shouldn’t allow anyone to violate law and disturb peace.
This news was published in print paper. To access the complete paper of this day.

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ST’s political wing wants Pakistan to be declared Sunni state

17 Apr

The News
By By Shamim Bano  Karachi

Pakistan Inquilabi Tehreek (Pakistan Revolutionary Movement), the political front of the Sunni Tehrik (ST), has emerged on the political horizon of the country with the aim to change the future of Pakistan by implementing Nizam-e-Mustafa “through radical polices and not by force.”

“Pakistan is a Sunni state and the laws of the Sunni sect should be implemented in the country as per the Constitution,” ST Central Coordination Committee Member Shakeel Qadri told The News. The Pakistan Inquilabi Tehreek (PIT) was formed with ST chief Sarwat Ejaz Qadri as its “lifetime chairman,” while other office-bearers will either be nominated by its chairman or through a vote count.

The formal announcement regarding the PIT was made by Sarwat Ejaz Qadri at the Jaan Nisaran-e-Mustafa Conference. This new “political force” has been formed as a parallel to the Muttahida Qaumi Movement (MQM), said media coordinator Faheemuddin Shaikh. The PIT will have its offices across the country, including Azad Kashmir, he said.

The idea of the PIT was not new because it was also discussed with slain ST chief Abbas Qadri and even with leaders who were eliminated two years ago in the Nishtar Park bomb blast, he said.

The leaders who survived the bombing held marathon meetings with the party members across the country and a committee was formed to “visualize the ground reality.” After hectic consultations it was decided that the ST’s political wing, the PIT, will be formed to take up the issues confronting the party.

“The first and foremost objective of the party is the implementation of Nizam-e-Mustafa in its true spirit, followed by the formation of a welfare state and ensuring protection to minorities,” Shaikh said, adding that Christians and Hindus, as well as all other religious sects having a small number of followers also fall in the ambit of minority.

Since Eid Milad-un-Nabi is celebrated throughout the county with religious fervour, it implies that Pakistan happens to be a Sunni Barelvi state and not Deoband, because Deobandis do not believe in celebrating Eid Milad-un-Nabi, Shaikh claimed.

The existing political forces in the country cannot resolve the issues of the people, in the way the PIT can, he maintained. The PIT flag will have a green background, with red depicting an Islamic revolution. The party will try to enforce Nizam-e-Mustafa through the parliament and not by force as in Swat. “The PIT believes in democracy and through its teaching and training the party will draw the youth of the country towards Islam, as it is the only religion which gives the right path and direction of life,” he said.

The party will be headquartered in Karachi, and will have divisional offices in all major cities of the country. “It will, however, be premature to say whether ST offices will accommodate PIT or whether it will have separate offices,” Qadri said. He said they will certainly take part in the next general elections and hoped that they will win seats in Karachi and other cities of the country. “The Jaan Nisaran-e-Mustafa Conference was a trailer that proved our majority,” he added.

Milad Juloos

16 Mar

Milad Unabi in Kashmir——-

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KASHMIR/

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